गर्भावस्था में योग का प्रभाव


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विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनोंके अनुसार यदि गर्भावस्था के प्रारंभिक चरण मे योग शुरू कर दिया जाये तो इसके काफी फायदे होते हैं। बेददोएएवं अन्यद्वारा किये गए एक अध्ययन में ये सामने आया कि जिन महिलाओं ने दूसरी तिमाही में योग का अभ्यास किया उन्हें तीसरी तिमाही मे अन्य महिलाओं से कम शारीरिक दर्द होता है। योग करनी वाली महिलाओं कोउनकी तीसरी तिमाही में कम तनाव और चिंताका सामना करना पड़ता है। सुण एवं अन्य (2009) द्वारा किये गए एक अन्य अध्ययन के अनुसार जिन महिलाओं ने बच्चे के जन्म के पूर्व ही योग कार्यक्रम में भाग लिया उन महिलाओं को गर्भावस्था के 38-40 हफ्तों के दौरानहोने वाली असुविधाएँ काफी कम हुईं। योग कार्यक्रम में भाग लेने वाले महिलाओं ने प्रसव-काल के सक्रिय चरण और दूसरे चरण के दौरान उच्च परिणाम और आत्म बल का प्रदर्शन किया। उन्होंने यह भीसुझाव दिया दिया कि योग पर आधारित पुस्तकें और वीडियो की सुविधायें गर्भावस्था के दौरान होने वाली पीड़ा को कम करने और बच्चे के जन्म के समयमाँ के आत्मबल को बढ़ाने में बहुत योगदान देती हैं। सत्यप्रिय एवं अन्य (2009) के अनुसार योग कथित तनाव कम करता है और स्वस्थ गर्भवती महिलाओं में तनाव को झेलने कि शक्ति देता है जबकि चुन्थ्रापट एवं अन्य(2008) के अनुसार योग प्रसव के दौरान माँ को काफ़ी हद तक आराम देता है। और प्रसव के दो घंटे बाद पीड़ा को काफी हद तक कम करता है। प्रसव के प्रथम चरण की अवधि के साथ साथ पूरे प्रसव की समयावधि योग के कारण कम हो जाती है। नरेन्द्रन एवं अन्य (2005) द्वारा किये गए अध्ययन मे ये सामने आया कि योग का अभ्यास करने वाली महिलों को गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप, अंतर्गर्भाशयी विकास मंदता और समय से पहले प्रसव जैसी समस्याओं का सामना कम करना पड़ता है। उनके अनुसार गर्भावस्था के दौरान सही तरीके से योगकिया जाये तो वह पूरी तरह से सुरक्षित है। योग जन्म के समय बच्चे के वजन को बेहतर बनाता है, अपरिपक्व प्रसव को कम करता है, बिना किसी दिक्कत के आई यू जी आर(IUGR) को कम करता है चाहे वह अकेला हो या पी आई अच (PIH) के साथ जुड़ा हो। फील्ड (2008) द्वारा एक समीक्षा के अनुसार वैकल्पिक चिकित्सा, गर्भावस्था से संबंधित पीठ और पैर में दर्द, मतली, अवसाद, कोर्टिसोल के स्तर और अपरिपक्वता दर को कम करने के लिए काफी प्रभावी है। प्रसव से सम्बंधित अनुसंधान से आम तौर पर ये पता चलता है कि वैकल्पिक चिकित्सा दर्द कम करती है और दवा की जरूरत को भी कम करती है।

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