स्वभाव और मनोरोग विकार पर योग का प्रभाव


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बहुत सारे अध्ययनों से यह पता चला है कि योगाभ्यास बेसल चिंता स्कोर में महत्वपूर्ण कमी का उत्पादन कर सकता हैं। खालसा एवम् अन्य (2009) ने यह सिद्ध किया कि दो महीने तक योग और ध्यान की तकनीकों का उपयोग करके पेशेवर संगीतकारों के प्रदर्शन के दौरान होने वाली चिंता और स्वभाव में आने वाली अशांति को कम किया जा सकता हैं। जवानभक्त एवम् अन्य ने सिद्ध किया है कि जिन महिलाओं को चिंता विकारों का सामना करना पड़ता है, यदि वे दो महीनों तक योग कार्यक्रमों में भाग लेती हैं, तो उनके चिंता विकारों में आती है। खोजास एवम् अन्य ने सिद्ध किया हैं कि एक महीने के योग कार्यक्रमों के अभ्यास के बाद चिंता, अवसाद, और तनाव के स्कोर में महत्वपूर्ण कमी हो होती हैं। वुलरी एवम् अन्य (२००९) ने सिद्ध किया कि जो व्यक्ति पांच हफ़्तों तक योग पाठ्यक्रम में भाग लेते हैं, तो वह स्वयं अपने भीतर अवसाद के लक्षणों और विशेष चिंताओं में कमी महसूस करते हैं। शर्मा एवम् अन्य ने सिद्ध किया है, जिन लोगों ने एंटी-दवाएं के साथ-साथ दो महीनों तक सहयोग ध्यान का अभ्यास किया। उन लोगों में चिंता विकार का स्तर कम हो गया तथा इनकी तुलना में जो लोग सिर्फ़ दवाओं का सेवन करते थे। उनके चिंता विकार में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। इसी प्रकार से माइकल एवम् अन्य ने यह सिद्ध किया है कि जो महिलाएं मानसिक से गुजर रही थी, तीन महीने के अयंगर योगाभ्यास पाठ्यक्रम के द्वारा उन महिलाओं में तनाव, चिंता और थकान दूर हो गई तथा उनका मानसिक स्वास्थ्य भी ठीक हो गया, जिन व्यक्तियों को सिरदर्द और पीठदर्द था। उनके भी शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार आया। नवीन एवम् अन्य अध्ययन ने यह सिद्ध किया है कि तीन महीने के योगाभ्यास कर्यक्रम में भाग लेकर तनाव मापने के पैमाने “हैमिलटन डिप्रेशन रेटिंग स्केल के द्वारा भी तनाव दूर हो गया।

अध्ययन में पाया गया है कि जो लोग एक समूह में योग कर रहे थे तथा दूसरे समूह के लोग दवाओं के साथ योग करे रहे थे और तीसरे समूह के लोग जो केवल दवाएं ले रहे थे। इन सबकी तुलना में केवल योग करने वाले समूह के लोगों को अत्यधिक लाभ प्राप्त हुआ। इससे यह साबित होता है कि तनाव और चिंता विकार को दूर करने में योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। मालती और दामोदर (1999) ने प्रथम वर्ष एमबीबीएस के छात्रों के तनाव दूर करने के योगाभ्यास के परिणाम का अध्ययन किया। स्पीलबर्गर चिंता मापक द्वारा, उन्हें बताया कि तनाव कम हो गया, जो तनाव परीक्षा से पहले था वो योगाभ्यास के जरिये कम हो गया। परीक्षा के परिणाम के अनुसार जिस समूह ने योगाभ्यास किया। उनमें फ़ैल होने वालों की संख्या कम हो गई। योग के द्वारा होने वाले लाभ बहुत सारे हैं। योग समूह द्वारा प्रतिक्रिया स्कोर में इन लाभों का जिक्र किया, जैसे कि अच्छा स्वास्थ्य, आराम महसूस होना, एकाग्रता में सुधार, आत्म विश्वास में बढ़ोत्तरी, सक्षमता में सुधार, पारस्परिक संबंध, सावधानी में बढ़ोत्तरी, चिड़चिडेपन के स्तर में कमी, जीवन में एक आशावादी दृष्टिकोण। योगभाय्स सिर्फ़ मानसिक तनाव को दूर करने में मदद ही नहीं करता है बल्कि तनावपूर्ण परिस्थिति का सामना करने में भी सक्षम है। योगाभ्यास करने वाले अपने परिवेश और आंतरिक तनाव को बेहतर तरीके से कम करते हैं। इसलिए, वे अपने कर्तव्यों को सक्षम तरीके और शांति से करके, अपने कामकाज में प्रगति करते हैं। गुप्ता एवं अन्य (2006) ने यह सिद्ध किया कि केवल दस दिन का योगाभ्यास सम्मिलित जीवन शैली द्वारा, व्यक्ति के तनाव के स्तर पर काफी बेहतर परिणाम देता है। 

नियमित रूप से योग और ध्यान का आभास करने से मस्तिष्क में न्योरो ट्रांसमीटर के स्तर में बदलाव आएगा। जियर एवम् अन्य (2002) ने पेट स्केन तकनीकी के द्वारा साबित किया कि योग निद्रा ध्यान की स्थिति में इन्डो जींस डोपिमिन द्रव 65% बढ़ जाता है। योग निद्रा द्वारा सेलीबलर और सब-कोर्टिकल संबंधित भाग में रक्त संचार कम होता है तथा कार्यकारी नियंत्रण पर काबू पाता है। मस्तिष्क में डोपामिन नाम का एक पदार्थ होता है जो बहुत सारे चीजों पर नियंत्रण करता है तथा इसके इक्सिटेट्री, ग्लुटामटर्जिक, सिनापसों जिनका उभार फ्रंटल कोर्टेक्स, स्ट्रीटल से न्यूरॉन्स तक होता है, जिसका समयानुरुप उभार फ्रंटल कोर्टेक्स तथा पैलिडम तक वेंट्रल थैलामस के मार्ग से होता है। उन्होंने यह साबित किया कि ध्यान तथा समाधि की अवस्था में अधिक मात्रा का प्रवर्तन होता हैं। उन्होंने यह भी बताया है कि ध्यान तथा समाधि के परिणामस्वरूप कोर्टेक्स स्ट्रीटल ग्लुटामटर्जिक ट्रांसमिशन घटता है, जिसकी वजह से व्यक्ति के ध्यान में बढ़ोत्तरी होती है। योगाभ्यास करने वालों में योगाभ्यास के बाद मस्तिष्क में गाबा (जीएबीए) का स्तर बढता है। इस प्रयोग में योग विद्यार्थियों ने 60 मिनट का योगाभ्यास सत्र किया और दूसरे समूह ने 60 मिनट के पढ़ने का सत्र पूरा किया। इससे यह सिद्ध होता है कि जिसमें गाबा का कम स्तर होता है, उनके लिए योग चिकित्सा का उपयोग करना आवश्यक है।

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