हल्दी के औषधीय उपयोग


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हल्दी (टर्मरिक) भारतीय वनस्पति है। यह अदरक की प्रजाति का 5-6 फुट तक बढ़ने वाला पौधा है जिसमें जड़ की गाठों में हल्दी मिलती है। हल्दी को आयुर्वेद में चमत्कारिक द्रव्य माना गया है। हल्‍दी में पाये गये आवश्‍यक तत्‍व निम्‍न प्रकार हैं

जल 13.1 % ग्राम, प्रोटीन 6.3 % ग्राम, वसा 5.1 % ग्राम, खनिज पदार्थ 3.5 % ग्राम, रेशा 2.6 % ग्राम, कारबोहा‍‍इड्रेट 69.4 % ग्राम, कैल्शियम 150 मिलीग्राम प्रतिशत, फासफोरस 282 मिलीग्राम प्रतिशत,
लोहा 15 मिलीग्राम प्रतिशत, विटामिन ए 50 मिलीग्राम प्रतिशत, विटामिन बी 03 मिलीग्राम प्रतिशत

कैलोरियां प्रति 100 ग्राम में : 349 कैलोरी

हल्दी का विभिन्न रोगों में प्रयोग

हल्‍दी का चूर्ण 1 ग्राम और आवश्‍कतानुसार दूध मिलाकर बनाया हुआ पेस्‍ट मुहासों, युवान पीडिका, सफेद दागों या काले दागों, रूखी त्‍वचा,  काले रंग के त्‍वचा के धब्‍बे, खुजली, खारिश आदि तकलीफों में लगानें से आरोग्‍य प्राप्‍त होता है।

घाव,  कटे एवं पके हुये, पीब से भरे घावों में हल्‍दी का चूर्ण छिड़कनें से घाव शीघ्र भरते हैं।

चाकू या धारदार अस्‍त्र से शरीर का कोई अंग कट जानें पर हल्‍दी का चूर्ण छिड़कनें से लाभ प्राप्‍त होता है।

बवासीर के मस्‍सों का दर्द अथवा जलन ठीक करनें के लिये हल्‍दी का चूर्ण मस्‍सों पर छिड़कना चाहिये।

चेहरे का सौंदर्य , त्‍वचा का सौंदर्य ‍निखारनें के लिये हल्‍दी का उबटन प्रयोग करना चाहिये।

एलर्जी , शीतपित्‍ती, जलन का अनुभव,  ददोरे आदि पड़ जाने की तकलीफ में हल्‍दी को पानी के साथ पेस्‍ट जैसा बनाकर लगानें से आराम मिलता है।

फोड़ा फुन्‍सी पकानें के लिये हल्‍दी की पुल्टिस रखनें से फोड़ा फुंसी शीघ्र पक जाते हैं।

शरीर के किसी भी स्‍थान की सूजन के साथ दर्द और जलन हो तो हल्‍दी के पेस्‍ट का बाहरी प्रयोग करनें से इन तकलीफों में आम मिल जाती है।

सभी प्रकार के बुखार , जुखामों और खांसियों में हल्‍दी का चूर्ण 1 से 3 ग्राम तक गरम पानीं से दिन में दो बार , सुबह शाम , खानें से आरोग्‍य प्राप्‍त होता है।

जुकाम , बुखार अथवा खांसी कैसी भी हो , नया हो अथवा पुराना , उक्‍त प्रकार से हल्‍दी का सेवन करनें से सभी अवश्‍य ठीक हो जाते हैं।

नाक से संबंधित सभी तरह की तकलीफों , पुराना जुकाम , पीनस , नाक का गोश्‍त बढ़ जानें , साइनुसाइटिस में हल्‍दी का चूर्ण 1 से 2 ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार खाने से आरोग्‍य प्राप्‍त होता है।

उक्‍त तकलीफों से होनें वाले सिर दर्द , बुखार,  बदन दर्द आदि लक्षण ठीक हो जाते हैं।

एलर्जी, शीतपित्‍ती या इसी तरह के लक्षणों और तकलीफों से परेशान रोगी हल्‍दी का चूर्ण, 1 से 2 ग्राम, सुबह और शाम, दिन में दो बार, आधा कप दूध और आधा कप पानी मिलाकर, इस प्रकार से पकाये दूध के साथ खानें से आरोग्‍य प्राप्‍त होता है। दूध में यदि चाहें तो थोड़ी शक्‍कर स्‍वाद के लिये मिला सकते हैं।

2 से 3 ग्राम हल्‍दी चूर्ण गुनगुनें पानीं से , दिन में तीन बार , खानें से इस रोग में आराम मिलती है।

कुछ दिनों तक लगातार खाने से रोग समूल नष्‍ट हो जाते हैं। जैसे जैसे इस्‍नोफीलिया का काउन्‍ट कम होता जाये , वैसे हल्‍दी की मात्रा अनुपात में घटाते जाना चाहिये।

इस रोग में हल्‍दी का चूर्ण 2 से 3 ग्राम तक अदरख के एक या दो चम्‍मच रस और शहद मिलाकर दिन में चार बार खानें से आरोग्‍य प्राप्‍त होता है। कुछ दिनों तक यह प्रयोग लगातार करना चाहिये। अगर रोगी एलापैथी की दवायें खा रहा है , तो भी यह प्रयोग कर सकते हैं। जैसे जैसे आराम मिलता जाय, एलापैथी दवाओं की मात्रा कम करते जाएँ।

यकृत के सभी विकारों में, पीलिया, पान्‍डु रोग इत्‍यादि में हल्‍दी का चूर्ण 1 ग्राम, कुटकी का चूर्ण 500 मिलीग्राम मिलाकर दिन में तीन बार सादे पानीं के साथ खाना चाहिये।

बहुमूत्र, गंदा पेशाब, पेशाब में जलन, पेशाब की कड़क, पेशाब में एल्‍बूमेंन जाना, पेशाब में रक्‍त, पीब के कण आदि आदि रोगों में हल्‍दी चूर्ण 1 ग्राम दिन में चार बार सादे पानीं से सेवन करने से लाभ मिलता है।

हल्‍दी 2 ग्राम, जामुन की गुठली का चूर्ण 2 ग्राम, कुटकी 500 मिलीग्राम मिलाकर दिन में चार बार सादे पानीं से खायें।

अगर त्वचा पर अनचाहे बाल उग आए हों तो इन बालों को हटाने के लिए हल्दी पाउडर को गुनगुने नारियल तेल में मिलाकर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को हाथ-पैरों पर लगाएं। ऐसा करने से शरीर के अनचाहे बालों से निजात मिलती है।

चोट लगने या मोच होने पर हल्दी बहुत फायदा करती है। मांसपेशियों में खिंचाव या अंदरूनी चोट लगने पर हल्दी का लेप लगाएं या गर्म दूध में हल्दी पाउडर डालकर पीजिए।

धूप में जाने के कारण त्वचा अक्सर टैन्ड हो जाती है। टैन्ड त्वचा से निजात पाने के लिए हल्दी पाउडर,
बादाम चूर्ण और दही मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाइए। इससे त्वचा का रंग निखर जाता है और
सनबर्न की वजह से काली पड़ी त्वचा भी ठीक हो जाती है। यह एक तरह से सनस्क्रीन लोशन की तरह काम करता है।

हल्दी को दूध में मिलाकर इसका पेस्ट बना लीजिए। इस पेस्ट को चेहरे पर लगाने से त्वचा का रंग निखरता है और आपका चेहरा खिला-खिला दिखेगा।

दाग, धब्बे व झाइंया मिटाने के लिए हल्दी बहुत फायदेमंद है। चेहरे पर दाग या झाइंया चेहरे के दाग-धब्बे और
झाइयां हटाने के लिए हल्दी और काले तिल को बराबर मात्रा में पीसकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं।

मुंह में छाले होने पर गुनगुने पानी में हल्दी पाउडर मिलाकर कुल्ला करें या हलका गर्म हल्दी पाउडर छालों पर
लगाएं। इससे मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

अगर आप कोंई एलोपैथी की दवा खा रहे हैं या होम्‍योपैथिक या कोई अन्‍य उपचार कर रहे हैं , तो भी आप हल्‍दी का प्रयोग कर सकते हैं | इसके कोई साइड इफेक्‍ट नहीं हैं और हल्‍दी पूर्ण रूप से सुरक्षित औषधि है।

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