योग चिकित्सा के लाभ


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ऋषि-मुनियों ने योग की खोज स्वस्थ रहते हुए लम्बी आयु पाने के लिए की थी। किसी भी व्यक्ति को बीमार करके मृत्यु की ओर धकेलने वाले मल एवं अन्य विकार को दूर कर योग स्वस्थ तथा शक्तिशाली जीवन देता है। योग करने से रीढ़ की हड्डी सहित अन्य हड्डियां लचीली और मजबूत हो जाती हैं।

इससे जल्द बुढ़ापा नहीं आता है। आसनों के करते रहने से मांसपेशियों को ताकत मिलती है। जिससे भीतरी अंग मजबूत होते हैं तथा रक्त वाहिनियाँ सही तरह से काम करती हैं।  योग के आसनों को करने से रक्तवाहिनियां भी लचीली बनी रहती हैं।

जिससे हृदय तक रक्त आसानी से पहुँचने के कारण हृदय स्वस्थ बना रहता है। इस क्रिया से खून भी साफ़ रहता है। इससे नाड़ियाँ और धमनियाँ मजबूत होकर फेफड़ों, मस्तिष्क तथा आँखों को लाभ पहुँचाती हैं।

योग के आसनों को निरंतर करने से शरीर के भीतरी अंगों में जमा मल और विष बाहर निकल जाता है। जिससे वे सुचारू रूप से कार्य करने लगते हैं। आसनों से शरीर के भीतरी अंग लम्बे समय तक स्वस्थ बने रहते हैं।  योग करने से संपूर्ण देह कांतिमय, सुन्दर और स्वस्थ हो जाती है। आसन शरीर को सुन्दर आकृति देने में भी कारगर हैं।

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