योग द्वारा माइग्रेन की चिकित्सा व रोकथाम


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माइग्रेन में पीड़ित व्यक्ति को रह-रहकर बहुत तेज  सिरदर्द के अटैक पड़ते हैं। माइग्रेन आधे, पूरे या सिर के किसी भी भाग में हो सकता है। माइग्रेन में कई घंटों या कई दिनों तक तेज दर्द रह सकता है। इस दौरान सिरदर्द, जी मिचलाने, उल्टी, कानों का बजना, सुनने में तकलीफ जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

माइग्रेन अटैक दो तरह के होते हैं। ऑरा रहित माइग्रेन अटैक (कॉमन माइग्रेन) और दूसरा ऑरा माइग्रेन अटैक (क्लासिक माइग्रेन)। कॉमन माइग्रेन में सिरे के एक हिस्से में हल्का या तेज दर्द शुरू होकर पूरे सिर में दर्द फैल जाता है।  क्लासिक माइग्रेन में दर्द कॉमन माइग्रेन की तरह ही होता है। फर्क बस इतना होता है कि इसमें पीड़ित व्यक्ति को वॉर्निंग साइन (ऑरा के रूप में) सिरदर्द का पूर्वाभास हो जाता है। ऑरा यानी चमक कौंधना, चीजें घूमती या हिलती हुई नजर आना, काले धब्बे दिखना, हाथ-पैर में झुनझुनाहट, फूड क्रेविंग, बोलने के समय कठिनाई महसूस करना जैसा प्रतीत होगा।

मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में मौजूद ब्लड वेसल के सिकुड़ने के कारण पहले ऑरा और बाद में माइग्रेन की स्थिति उत्पन्न होती है। महिलाओं में एस्ट्रोजेन हार्मोन का स्तर कम होने, पीरियड के समय या उससे पहले भी सिरदर्द हो सकता है। इसके अलावा कैफीन का अधिक उपयोग, अल्कोहल का सेवन, तनाव, बेचैनी, पर्याप्त नींद न लेना, अधिक यात्रा करना, मसालेदार भोजन करना, शारीरिक थकावट, संवेदनात्मक उत्तेजना, जैसे- तेज प्रकाश, फोटोफोबिया यानी प्रकाश से परेशान, तेज आवाज से समस्या, धूप से आंख चौंधियाना आदि माइग्रेन के कारण हैं।

विभिन्न शोध एवं अध्ययन के अनुसार माइग्रेन में कुंजल क्रिया, प्रणाम में अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, योग निद्रा तथा शवासन आदि करने से लाभ मिलता है. लेकिन, जहां भी योग करें वह जगह प्रकाश से चकाचौंध वाली, तेज धूप, तेज गंध वाली नहीं होनी चाहिए। माइग्रेन रोगियों को अच्छी नींद लेनी चाहिए। इसके अलावा मसालेदार भोजन, जंक और डिब्बाबंद फूड, अल्कोहल, धूम्रपान का सेवन न करें। ताजे फल, प्रोटीनयुक्त डाइट जैसे दूध, दही, पनीर, दाल, मांस और मछली आदि का सेवन करें। 

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