योग द्वारा दमा (Asthma) की चिकित्सा व रोकथाम


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फेफड़े के तन्तुओं में सिकुड़न आ जाने के कारण वे श्वाँस को अन्दर पचा नहीं पाते। जिससे रोगी पूरी श्वाँस लिए बिना ही छोड़ने को मजबूर हो जाता है। इससे रोगी को श्वाँस लेने में परशानी होने के कारण  खांसी आने लगती है। इस अवस्था को दमा कहते हैं। इसके रोगी को स्वाँस लेते समय हल्की सीटी बजने जैसी आवाज सुनाई पड़ती है। इस रोग के अधिक बढ़ जाने पर रोगी को श्वाँस लेने में अधिक परेशानी के साथ-साथ दौरे पड़ने लगते हैं। शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाने से रोगी का चेहरा नीला पड़ जाता है। रोगी को सख्त, बदबूदार तथा डोरीदार कफ निकलता है।

वंशानुगत होने के साथ-साथ मानसिक तनाव, क्रोध, अधिक भय, रक्त दोष, लम्बे समय तक सर्दी-जुकाम या नजला, गरिष्ठ भोजन, धूम्रपान, एलर्जी, वायु प्रदूषण, नजला के समय सम्भोग आदि कारणों से दमा होने की सम्भावना रहती है। हृदय, फेफड़े, गुर्दे, आँत तथा स्नायुमंडल में कमजोरी व नाकड़ा रोग के कारण भी दमा रोग हो सकता है। इसके अतिरिक्त औषधियों के अधिक प्रयोग से कफ सूखने, मलमूत्र के वेग को बार-बार रोकने तथा पाचन नलियों में जलन करने वाले पदार्थों के सेवन से भी दमा की बीमारी होने की संभावना रहती है।

इसके रोगी प्रतिदिन नींबू तथा शहद को पानी के साथ लेते हुए एक सप्ताह तक हरी सब्जियों का रस तथा सूप पीकर उपवास करें। इसके बाद दो सप्ताह तक बिना पका भोजन करने के बाद साधारण भोजन करना चाहिए। नारियल पानी सहित दूब, चुकंदर, अंगूर, पत्ता गोभी तथा सफ़ेद पेठे के रस का सेवन करने से भी इस रोग में लाभ मिलता है। तुलसी तथा अदरख का रस शहद के साथ तथा नींबू पानी में एक चम्मच त्रिफला मिलकर लेने से यह बीमारी ठीक हो जाती है। एक कप गर्म पानी में शहद डालकर दिन में तीन बार पीने से भी दमा में लाभ मिलता है।

दमा के मरीज को रात में समय से पहले भोजन तथा सोने से पहले गर्म पानी लेना चाहिए। इस मर्ज में अजवाइन की भाप लेना भी बहुत लाभदायक होता है। प्रतिदिन छाती तथा रीढ़ की हड्डी पर सरसों के तेल में कपूर डालकर मालिश करने के बाद भाप स्नान करना भी रोगी के लिए लाभप्रद है।        

विभिन्न शोध एवं अध्ययन के अनुसार प्रतिदिन नियमित रूप से योग, जलनेति, भस्त्रिका, मुद्रासन, प्राणायाम (कुम्भक को छोड़कर), ताड़ासन, मकरासन, शलभासन, अश्वस्थासन, उत्तान कूर्मासन, नाड़ीशोधन, कपालभाति, उड्डीयान, बंध, महामुद्रा, श्वास-प्रश्वास, गोमुखासन, मत्स्यासन, उत्तामंडूकासन, भुजंगासन तथा धनुराशन आदि करने से दमा की बीमारी पूरी तरह ठीक हो जाती है। 

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