सूर्य नमस्कार से इन गंभीर बीमारियों में होता है लाभ, जानें 12 फायदे


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सूर्य नमस्कार को जब धीमी गति से किया जाता है यानी प्रत्येक आकृति में कुछ मिनटों के लिए रुका जाता है तब इस योग के आसनों का लाभ मिलता है, शरीर के प्रत्येक अंग पर प्रभाव पड़ने से शरीर की आन्त्रिक क्षमता में अदभुत वृद्धि होती है।

1. सूर्य नमस्कार करते समय लम्बी सांस भरने से शरीर रिलेक्स होता है जिससे बेचैनी व तनाव दूर होता है तथा दिमाग शान्त होता है।

2. इसके अभ्यास से पाचन प्रणाली सशक्त होती है। ग्रहण किया गया आहार पूर्ण रूप से पचता है जिससे शरीर की सातों धातुएं पुष्ट होती हैं। शरीर की सप्त धातुओं के पुष्ट होने से शरीर वीर्यवान होता है। इसका नियमित अभ्यास करने वाले युवा दाम्पत्य जीवन का भरपूर आन्नद लेते हैं।

3. शरीर की चयापचय प्रक्रिया तेज होने के साथ-साथ शरीर के हर भाग पर खिंचाव व दबाव पड़ने से शरीर में जमा अनावश्यक चर्बी हटने लगती है। अगर आप मोटे है तो सूर्य नमस्कार का नियमित अभ्यास करें।

4. इसका नियमित अभ्यास करने वाले मिताहारी होते हैं यानी वे कम आहार से ही संतुष्ट हो जाते हैं। इससे भी शरीर का वजन नियन्त्रित रहता है।

5. शरीर क़ब्ज व गैस बनने की शिकायत से मुक्त होता है। सूर्य नमस्कार शरीर में वात पित्त और कफ को साम्य अवस्था में रखता है जिससे शरीर कई प्रकार के रोगों का शिकार होने से बज जाता है।

6. मधुमेह (Diabetes) को नियंत्रित करने में काफी प्रभावशाली है।

7. आजकल नींद न आने की समस्या से बहुत लोग परेशान रहते हैं। इसके नियमित अभ्यास से थोड़े ही दिनों में अनिद्रा की समस्या से मुक्ति मिल जाती है।

8. इसके नियमित अभ्यास से एक तो शरीर की मांसपेशियां पुष्ट होती है जिससे हड़्डियों व इसके जोड़ों पर शरीर के वजन का भार कम आता है।

9. सूर्य के सामने इसका अभ्यास करने से शरीर को विटामिन ‘डी’ मिलता है। शरीर में लचीलापन आता है तथा अकड़न खत्म होती है। इन सबके कारण भविष्य में हो सकने वाले गर्दन दर्द, पीठ दर्द, कमर दर्द व अन्य प्रकार के दर्दों से शरीर सुरक्षित हो जाता है।

10. इसके अभ्यास से चेहरे की झुर्रियां खत्म होती है तथा चेहरे पर तेजस्विता आती है।

11. इसके अभ्यास से शरीर की अन्तःस्त्रावी ग्रन्थियां ठीक प्रकार से कार्य करती है और शरीर के हार्मोंन्स सन्तुलित होते हैं। जिन महिलाओं को अनियमित मासिक धर्म की समस्या होती है उन्हें इसे करना चाहिए। कुछ ही दिनों में मासिक धर्म व्यवस्थित हो जाता है।

12. सूर्य नमस्कार छोटी उम्र से ही प्रारम्भ किया जा सकता है। इसीलिए इसे शालेय शिक्षा में स्थान दिया गया है। इसके प्रभाव से बुद्धि प्रखर होती है जिससे विधार्थी परीक्षा में चमत्कारिक परिणाम लाते हैं।

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