योग का अर्थ एवं दैनिक जीवन में योग का अर्थ एवं दैनिक जीवन में महत्व


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सदियों से योग प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं जीवन-शैली का एक अभिन्न रहा है।  जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाकर जीवन की पूर्णता को प्राप्त किया जा सकता है। वैज्ञानिकों शोधों द्वारा प्रमाणितयोग एक ऐसी ऐसी सुलभ एवं प्राकृतिक व्यायाम पद्धति है जिसके लिए न तो ज्यादा साधनों की जरुरत होती हैं और न ही अधिक खर्च की। कई  वैज्ञानिकों और चिकित्सकों ने स्वीकार किया है कियोग से बिना कोई नुकसान पहुंचे अदभुत लाभ लिए जा सकते हैं। योग का केंद्रीय बिंदु है ध्यान एवं स्वसन क्रिया, जो मानव मन को स्थिर करशांति प्रदान करती है। इससे न सिर्फ शरीर स्वस्थ रहता हैं, बल्कि तनाव संबंधी हॉर्मोन ‘बीटा एंड्रोफिन’में भी कमी आती हैं।योग प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाकर जीवन में नव-ऊर्जा का संचार करता है। योगशरीर को शक्तिशाली एवं लचीला बनाने के साथ साथ तनाव से भी छुटकारा दिलाता है। योग से उच्च रक्तचाप सामान्य होता है, तनाव कम होता है, मोटापे और कोलेस्ट्रोल पर नियंत्रण होता है इसके साथ ही व्यक्ति का रक्तसंचार तेज होता है जिससे सौंदर्य में भी वृद्धि होती है। इसका प्रभाव तन ही नहीं बल्कि मन की शांति पर भी पड़ता है।

वास्तव में योग शरीर, मन तथा आत्मा को प्रदीप्त करने की कला हैं। इस प्रक्रिया में आसन, प्राणायाम, मुद्रा, बंध, ध्यान और षट्कर्म जैसे पक्षों का अभ्यास जरुरी हैं। आज योग को शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ चिंता, तनाव और मनोरोग को दूर करने का सबसे बेहतरीन और आसान तरीका माना जा रहा है। योग के अदभुत लाभों के कारण सम्मपूर्ण विश्व अब योग में भावी सम्मभावनयों को तलाश रहा है।

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