22 अप्रैल विश्व पृथ्वी दिवस


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गाँधीजी ने बरसों पहले भारत को विकास के त्रुटिपूर्ण ढाँचे को अपनाने के विरुद्ध सचेत किया था। उनका सोचना था कि औद्योगिकीकरण सम्पूर्ण मानव जाति के लिये अभिशाप है। इसे अपनाने से लाखों लोग बेरोजगार होंगे। प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होगी। बड़े उद्योगपति कभी भी लाखों बेरोजगार लोगों को काम नहीं दे सकते। गाँधी जी मानते थे कि औद्योगिकीकरण का मुख्य उद्देश्य अपने मालिकों के लिये धन कमाना है।

आधुनिक विकास के कारण होने वाली पर्यावरणीय हानि की कई बार क्षतिपूर्ति सम्भव नहीं होगी। उनका उपरोक्त कथन उस दौर में सामने आया था जब सम्पूर्ण वैज्ञानिक जगत, सरकारें तथा समाज पर्यावरण के धरती पर पड़ने वाले सम्भावित कुप्रभावों से पूरी तरह अनजान था। वे मानते थे कि गरीबी और प्रदूषण का गहरा सम्बन्ध है। वे एक दूसरे के पोषक हैं। गरीबी हटाने के लिये प्रदूषण मुक्त समाज और देश गढ़ना होगा।

गाँधी जी का उक्त कथन पृथ्वी दिवस पर न केवल भारत अपितु पूरी दुनिया को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। वह विकास की मौजूदा परिभाषा को संस्कारित कर लालच, अपराध, शोषण जैसी अनेक बुराईओं से मुक्त कर संसाधनों के असीमित दोहन और अन्तहीन लालच पर रोक लगाने की सीख देता है। वह पूरी दुनिया तथा पृथ्वी दिवस मनाने वालों के लिये लाइट हाउस की तरह है।

विश्‍व भर में 22 अप्रैल का विश्व पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। यह एक विशेष दिन है जो हमें याद दिलाता है कि हम अपने ग्रह को सुरक्षित रखने के दायित्‍व आपस में बांटें

आइए शपथ लें और शामिल हो जाएं :

a.             और अधिक पेड़ लगाना

b.             अपशिष्‍ट की मात्रा में कमी

c.             पुन:चक्रण योग्‍य उत्‍पाद उपयोग करें

d.             ऑर्गनिक खाद्य पदार्थ अपनाएं

e.             बिजली की बचत करें

f.              फ्लोरसेंट लाइट बल्‍ब का उपयोग कर

g.             खरीदारी के थैले कई बार उपयोग करें

h.             प्रदूषण की रोकथाम करें

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