अष्टांग योगा


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अष्टांग योगा में शरीर के आठ अंगों से जमीन को स्पर्श करते हैं इसलिए इसे अष्टांग योगा कहते हैं। इस आसन में जमीन का स्पर्श करने वाले अंग चिन, चेस्‍ट, दोनों हाथ, दोनों घुटने और दोनों पैर हैं। इस आसन को करते वक्त इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि पेट से शरीर का स्पर्श बिलकुल ही न होने पाए। अष्टांग आसन मुद्रा में टेबल मुद्रा, श्वान मुद्रा और सर्प मुद्रा के आसनों का अभ्यास किया जाता है। इस आसन को जमीन पर करने से पहले अपने घुटने के नीचे कंबल अथवा तौलिया मोडकर रख लीजिए इससे घुटने आरामदायक स्थिति में रहेंगे और आप ज्यादा देर तक योगा कर सकते हैं। अष्टांग योगा करने से पीठ और गर्दन में मौजूद तनाव दूर होता है और अष्टांग आसन को हर रोज करने से शरीर की हड्डियां मजबूत होती हैं और शरीर लचीला होता है।

अष्टांग योगा के आठ अंग होते हैं -

1-    यम

2-    नियम

3-    आसन

4-    प्राणायाम

5-    प्रत्याहार

6-    धारणा

7-    ध्यान

8-    समाधि

अष्टांग योगा करने से फेफडों की कार्यक्षमता बढती है।

अष्टांग योगा करने से मोटापा आसानी से कम किया जा सकता है।

अष्टांग योगा करने से पाचन क्रिया अच्छी होती है और पेट सं‍बंधित रोग नहीं होते हैं।

अष्टांग योगा करने से दिमाग तेज होता है और आदमी की उम्र भी बढती है।

 

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