।। कंधों और बांहों के लिए योग आसन ।।


corporate yoga classes

योग के कुछ आसान आसनों में कंधा संचालन भी है। कठिन योग करने से पहले कुछ कंधा संचालन योग किया जाए तो शरीर हल्का हो जाता है और जोड़ों में लचक भी आ जाती है। कंधा संचालन कभी भी अपनी सुविधा के अनुसार कोई भी कर सकता है।

कंधा संचालन योग के लाभ

कंधा संचालन से पीठ के ऊपरी हिस्सों को रिलैक्स मिलता है। इस योग के अभ्यास से कंधे और गर्दन से सम्बन्धित कई प्रकार की समस्याओं में लाभ मिलता है। आप इस योग से तनाव से मुक्ति और मानसिक रूप से शांति की अनुभूति भी कर सकते हैं। कंधा संचालन योग के नियमित अभ्यास से कंधों में तनाव नहीं रहता है और ये अधिक सक्रिय रूप से कार्य करते हैं।

 

कंधा संचालन योग मुद्रा

इस योग को आप चाहें तो बैठकर अथवा खड़े होकर भी कर सकते हैं। चाहें तो आफिस अथवा घर में कुर्सी पर बैठकर भी इस योग का अभ्यास कर सकते हैं। इस योग को करते समय पहले दोनों कंधों को आगे पीछे मूवमेंट करना चाहिए फिर ऊपर नीचे। दोनों क्रियाएं अलग अलग करना चाहिए एक साथ नहीं।

सावधानियां

जिन लोगों के कंधों में परेशानी हो अथवा चोट लगी हो उन्हें कंधा ठीक होने के बाद ही यह योग करना चाहिए।

योग क्रिया 1

(1) कंधा संचालन में सबसे पहले आरामदायक स्थिति में बैठना चाहिए और दानों हाथों को दोनों जंघा पर हल्के से रखना चाहिए। (2) सांस खींचते हुए अपने कंधों को पीछे की ओर ले जाना चाहिए। (3) सांस छोड़ते हुए कंधों को आगे चाहिए। इस क्रिया में बाहों को कंधे का अनुसरण करते हुए आगे पीछे लाना चाहिए। इस योग का अपनी सुविधानुसार 2-5 मिनट तक अभ्यास करना चाहिए।

योग क्रिया 2

(1) पहली क्रिया के बाद इस क्रिया को करना चाहिए। पहली क्रिया में जिस प्रकार कंधे को आगे पीछे आपने किया उसी प्रकार इसमें कंधे को ऊपर नीचे करना होता है। (2) सांस लेते हुए कंधे को ऊपर की तरफ कान के पास तक ले जाना चाहिए (3) सांस छोड़ते हुए कंधे को नीचे की तरफ लाना चाहिए। इस योग का अपनी सुविधानुसार 2-5 मिनट तक अभ्यास करना चाहिए।

बॉह संचालन योग

आसन योगों में बांह संचालन भी एक है। इस योग के करते समय शरीर को संतुलित रखना चाहिए। अभ्यास करने वालों को बाहों के मूवमेंट के अनुसार श्वास प्रश्वास पर भी ध्यान देना चाहिए। इस योग को करते समय कमर और छाती दानों ऊपर खींचते हैं और सीना फैलता है। इस क्रिया में मूवमेंट के क्रम में आप गहरी सांस ले पाते हैं। इस योग को बैठ कर भी किया जा सकता है।

योग के लाभ

बांहों के संचालन से शरीर के ऊपरी भागों में रक्त संचार सुचारू हो पाता है। यह योग बांहों, हाथों, उंगलियों और हृदय के लिए विशेष रूप से लाभप्रद होता है। यह योग कंधों एवं गर्दन से तनाव को दूर करता है एवं मानसिक दबाव को भी कम करता है। इस योग का एक बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर को कठिन योगों के लिए तैयार करता है।

सावधानियां

जिन लोगों के कंधों में परेशानी हो अथवा चोट लगी हो उन्हें कंधा ठीक होने के बाद ही यह योग करना चाहिए।

योग की क्रिया

(1) संतुलित हो कर खड़े हो जाएं अथवा आराम की मुद्रा में बैठ जाएं। (2) दोनों हाथों को प्रार्थना मुद्रा में सीने के मध्य लाएं। (3) गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथों से सर्कल बनाते हुए ऊपर की ओर ले जाएं और हथेलियों को मिलाएं। (4) सांस छोड़ते हुए दोनों हाथों से सर्कल बनाते हुए हाथों को सामान्य स्थिति में लाएं। इस क्रिया को 10-12 बार दुहराएं। ध्यान रखना चाहिए कि इस क्रिया में कोहनी सीधी रहे।

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